Saturday, October 27, 2012

मै मामा बन गया !


प्यारी बहना तू माँ बन गई, ममता की छाँव बन गई ,
पूरी तेरी आकांक्षा हुई , जिवंत हर महत्वाकांक्षा हुई ,
ज़िन्दगी अब बिलकुल नई हुई, कभी तेरी हार नहीं हुई,
तू जीत गई हर उलझनों से,बाहर है दर्द के उपवनो से,
अनंत में जिसका अंत नहीं वो नीला आसमान है
धरा पे जिसका अंत नहीं तू वो ममतामयी माँ है ,
हाँ आसमान से उतरा एक नन्हा मासूम परिंदा ,
जो तेरे साथ बनेगा अब धरा का प्यारा बासिन्दा,
तेरी ममता की आँचल में हरदम खेलता रहेगा ,
आँखों का उजाला बन हरपल चमकता रहेगा ,
एक मामा आसमान में होगा चाँद मुस्कराता हुआ ,
एक मामा धरती पर मै हूँ भांजे को दुलारता हुआ ,
तू माँ तो मै भी मामा बनहाँ बहना गया !

तुझमे एक माँ माँ विश्वरूपी है ,मुझमे दो माँ सह्रुसहृदयी है,
माँ सा प्यार भला क्या दूंगा , पर मामा शब्द को जी लूँगा
भांजे के जीवन में हर ख़ुशी हरपल मै भरुगा ,
उसकी ख़ुशी के लिए भगवान से भी मै लडूंगा,
सबकी आँखों का तारा है जो प्राणों से प्यारा है वो ,
शिव का अंश शिवांश है ,तेरी ममता का वट वंश है
खुशियों का हरपल सजता जमघट है जो ,
रिश्तों के घर का हरदम मुस्काता पनघट है जो ,
लेकर हर खुशियाँ जीवन की नव मेहमान आया है
बहना आज फूल फूल नव बन मुस्काया है
तू माँ तो मै भी मामा बनहाँ बहना गया !

तेरा नाम करेगा रौशन ,तेरा नन्हा सा मोहन ,
घुटनों के बल पद चाप भरेगा आँगन में जो तन .
मुस्काएगा हर दम जिसे देख तेरा अंतर मन
छलक जायेगा तेरे आँचल से स्नेहिल स्पर्श ,
तू पायेगी ममता के बादल का कोमल अर्श ,
तू भाग्यशाली है जीवंत किया है जीवन को ,
कोटि कोटि नमन तेरे इस ममत्व जनम को ,
तुझको जब माँ कहेगा बड़े प्यार से नन्हा मुन्ना ,
मुझको भी कहेगा बड़े जोर से मासूमी से मामा
तू माँ तो मै भी बहना अब नन्हे का मामा गया !

यह कविता क्यों ? सोमवार २३ अक्तूबर को ८ वर्षों के मन्नतों के बाद आखिर भोले नाथ भोले बाबा ने सबकी अर्ज सुन ली और हम जीवन में पहली बार मामा बन गएँ ! यह रचना समर्पित है मेरे नन्हे भांजे के लिए आप सभी के आशीष व् स्नेह की अभिलाषा के सांथ 
 
- अरविंद योगी
 

2 comments:

  1. बहुत सुन्दर भावपूर्ण प्रस्तुति .शरद पूर्णिमा की हार्दिक शुभकामनाएं प्यारे भांजे को और आपको बहुत बहुत शुभकामनायें

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  2. बहुत-बहुत मुबारक हो!

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